अमेरिकी डॉलर में उतार-चढ़ाव, बढ़ते कोरोना वायरस के मामले और इससे संबंधित प्रतिबंध, प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से मिश्रित आर्थिक डाटा और अतिरिक्त प्रोत्साहन उपायों से सोने और चांदी की कीमत में उतार-चढ़ाव आता है। विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में सोने की कीमत पर सबसे बड़ा कारक वैक्सीन के मोर्चे पर प्रगति है।
जनवरी 2011 से लेकर दिसंबर 2020 तक के आंकड़े देखें तो सोना रिटर्न के मामले में सेंसेक्स और चांदी दोनों पर भारी पड़ा है। सोने ने इस दशक में 151 फीसदी का रिटर्न दिया है। सोने ने 2011 में तो अच्छी बढ़त ली, लेकिन इसके बाद जनवरी 2012 से लेकर जून 2017 तक यह 28,000 के आसपास रहा। यानी साढ़े पांच साल तक इसने कोई रिटर्न नहीं दिया। सोने में दोबारा तेजी दिसंबर 2019 से आना शुरू हुई और इसने नया ऐतिहासिक स्तर बना लिया।
एशिया में भौतिक सोने की मांग पिछले हफ्ते बढ़ी क्योंकि चीनी नव वर्ष ने चीन और सिंगापुर में खरीदारों को प्रोत्साहित किया है। भारत में सोने पर 12.5 फीसदी आयात शुल्क और तीन फीसदी जीएसटी लगता है।

