दुर्गा सप्तशती में कवच
कीलक अर्गला से भी महत्वपूर्ण सिद्ध कुंजिका स्तोत्र है। इसमें भगवान शंकर
ने मां पार्वती से कहा है कि हे देवी सुनो अब मैं तुम्हें एक ऐसे मंत्र के
विषय में बता रहा हूं की जिसके प्रयोग से मारण मोहन वशीकरण स्तंभन उच्चाटन
और विद्वेषण सभी प्रकार के अन्य सभी खट कर्म किए जा सकते हैं। ये देवी देवताओं के लिए भी दुर्लभ है अतः इसको अत्यंत गुप्त रखना चाहिए।
कुंजिका स्तोत्र का ही जो मंत्र है उसी का एक छोटा सा हिस्सा नवार्ण मंत्र
के रूप में जाना जाता है जिसका अधिकाधिक संख्या में, भक्तगण जाप करते हैं
और करवाते हैं। दुर्गा सप्तशती में रुद्रयामल तंत्र के अनुसार ध्यान
पवित्रीकरण आचमन अंग न्यास करण्यास हृदय न्यास के पश्चात संकल्प के साथ
किसी भी शुक्रवार से यदि कुंजिका स्तोत्र की एक माला प्रतिदिन जाप करना चाहिए।
रुद्रयामल तंत्र के अनुसार कुंजिका स्तोत्र के मंत्र में 64 योगिनी मां
भगवती के नौ स्वरूप मंत्र के देवता चामुंडा है तथा छंद अनुष्टुप है। साधक को चाहिए
साधना ब्रह्म मुहूर्त में करें साधना करने की विधि है स्नान के पश्चात लाल
या पीला वस्त्र धारण करें आसन ओनी या कुश का हो तथा मुख्य पूर्व की तरफ या
उत्तर की तरफ करके बैठे। सर्वप्रथम गणेश पूजन नवग्रह पूजन उसके पश्चात
स्थान देवता का पूजन करें। पूजा प्रारंभ करने से पहले स्वस्तिवाचन नितांत
आवश्यक है। जिन्हें स्वस्तिव ना आता हो वह नित्य पूजा प्रकाश पद्धति की
पुस्तक मंगाकर अंग न्यास, कर न्यास, हृदय न्यास, संकल्प, आवाहन, पवित्रीकरण, क्षमा प्रार्थना वा विसर्जन आदि के मंत्र सरल रूप में
मिल जाएंगे, किंतु मंत्रों का स्पष्ट और शुद्ध उच्चारण आवश्यक है।
इसके
पश्चात मां भगवती की प्रतिमा को स्नान कराएं काम्या सिंदूर या रोली का चंदन
लगाएं गूगल की धूप दें, दीपक जलाएं भोग लगाएं मुख प्रक्षालन करवाएं इसके
बाद पान का पत्ता लॉन्ग और इलायची समर्पित करें अंत में कुछ द्रव्य अवश्य
चढ़ाएं। फिर ध्यान करते हुए कुंजिका स्तोत्र के मूल मंत्र का एक माला जाप
बहुत ही शांति पूर्वक करें तथा जाप पूरा होने के पश्चात माला का संपुट धुले
इसके पश्चात माला को गोमुखी में रख दें फिर देवी भगवती के किसी भी निवेद्य
मंत्र से उनका वंदन करें तथा आरती करें किंतु एक विशेष बात बताना चाहूंगा
की पूजा करते समय जो दीपक जल रहा हो उसमें दो फूल वाली लौंग अवश्य डालें
तथा आरती के समय कपूर के साथ दो फूल लौंग अवश्य जलाएं इससे देवी की कृपा
से घर प्राप्त होती है।
आरती के पश्चात क्षमा याचना का मंत्र पढ़ें एवं
विश्राम करने की आज्ञा मांगे तथा निवेदन भी करें और अंत में हरि ओम शांति
बोलकर जमीन पर तीन बार जल छोड़े। जमीन पर छोड़े हुए जल को अनामिका उंगली से
स्पर्श करके पहले दाएं आंख पर फिर बाएं आंख पर उसके पश्चात मस्तक पर लगाएं
इससे अस्थान देवता की कृपा प्राप्त होती है।
मंत्र इस प्रकार है-
मंत्र इस प्रकार है-
ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय
ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ज्वल
हं सं लं क्षं फट् स्वाहा
