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अजीबो-गरीब सामाजिक बहिष्कार: समाज में लौटने की शर्त- जूते सिर पर पैरों में पगड़ी, गोमूत्र पीयो


गुना में अजीब मामला सामने आया है। एक परिवार ने मंदिर के लिए दान में जमीन नहीं दी तो पंचायत ने उसका बहिष्कार करने का फैसला सुनाया। परिवार में होने वाली शादी से लेकर अंतिम संस्कार तक में समाज का कोई अन्य व्यक्ति नहीं जाएगा। समाज के दूसरे लोगों से भी इस परिवार से किसी भी प्रकार के संबंध रखने से मना किया गया है।

पंचायत के फरमान के अनुसार अगर परिवार को समाज में लौटना है तो जूता सिर पर रखना होगा। पगड़ी पैरों में रखनी होगी। गोमूत्र पीना होगा। साथ ही सभी पुरुषों को दाढ़ी कटवानी होगी। शहर के शिवाजीनगर में रहने वाले पीड़ित परिवार ने मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर से शिकायत की तो मामला प्रकाश में आया।

शिकायतकर्ता पीड़ित हीरालाल का कहना है कि ग्वाल समाज ने पंचायत बुलाकर उनके परिवार का बहिष्कार कर दिया है। उन्हें समाज के किसी कार्यक्रम में भाग नहीं लेने दिया जा रहा। पंचायत में पंचनामा बनाकर बहिष्कार किया है। पहले मोहलत दी थी और उसके बाद समाज ने सभी संबंध खत्म कर दिए। 

मई में कोरोना की वजह से भाई की मौत हुई। अंतिम संस्कार में समाज का कोई व्यक्ति नहीं आया। घर में शादी थी, उसमें भी समाज के लोगों ने दूरी बनाई। शिकायत करने वाले हीरालाल घोषी का आरोप है कि उनके परिवार ने 3 बिसबा (करीब 4000 वर्गफीट) जमीन मंदिर के लिए दान दी है। अब ग्वाल समाज की पंचायत दबाव बना रही है कि पूरी जमीन मंदिर के लिए दी जाए। इस जमीन पर हीरालाल और उसके भाई का घर बना हुआ है। 

हीरालाल का कहना है कि अब समाज के लोग पूरी जमीन मांग रहे हैं। इसके लिए उन पर निरंतर दबाव बनाया जा रहा है। घटना की पुष्टि करते हुए जिला कलेक्टर फ्रैंक नोबल ने कहा कि जनसुनवाई में आवेदन आया है, घोसी ने अपनी शिकायत के साथ उनसे संपर्क किया था, जिसके बाद जांच का आदेश दिया गया, एसडीएम को जांच करने के निर्देश दिए हैं। जिला कलेक्टर ने कहा, “शिकायत सही पाए जाने पर कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।”