Advertisement 2

साइबर ठगी में खाते से पैसे कट गए? जानिए वो 5 कदम, जिनसे रकम बचने या वापस मिलने की उम्मीद बढ़ सकती है


प्रदेश पुलिस एक्टिविटी | साइबर सुरक्षा विशेष रिपोर्ट

साइबर ठगी के पैसे वापस कैसे पाएं, यह सवाल हर उस व्यक्ति के मन में आता है जिसके बैंक खाते से ऑनलाइन धोखाधड़ी के जरिए रकम निकल गई हो। ऐसी स्थिति में सबसे पहले 1930 पर शिकायत करना और अपने बैंक को सूचना देना जरूरी है।

आपके मोबाइल पर बैंक से पैसे कटने का मैसेज आता है। आप खाते का बैलेंस देखते हैं और पता चलता है कि रकम किसी अनजान खाते में ट्रांसफर हो चुकी है। ऐसे समय में घबराहट होना स्वाभाविक है। लेकिन अगले कुछ मिनटों में आप जो कदम उठाते हैं, वे बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

क्या साइबर ठगी के बाद पैसे वापस मिल सकते हैं? क्या बैंक रकम रोक सकता है? और पुलिस तक शिकायत पहुंचाने का सही तरीका क्या है?

इसका जवाब है—कुछ मामलों में ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने या वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। हालांकि, हर मामले में रकम वापस मिलने की गारंटी नहीं होती। इसलिए देर किए बिना सही कदम उठाना जरूरी है।

साइबर ठगी के पैसे वापस पाने के लिए क्या करें?

पहला कदम: सबसे पहले 1930 पर कॉल करें

यदि आपके साथ ऑनलाइन बैंकिंग, UPI, क्रेडिट कार्ड या किसी अन्य डिजिटल भुगतान के माध्यम से वित्तीय साइबर ठगी हुई है, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।

यह हेल्पलाइन वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए है। इसका उद्देश्य संबंधित एजेंसियों और वित्तीय संस्थानों तक सूचना पहुंचाकर ठगी की रकम को आगे जाने से रोकने में मदद करना है।

गृह मंत्रालय के अनुसार, 30 जून 2026 तक इस व्यवस्था के माध्यम से 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बचाए जाने की सूचना दी गई थी। यह आंकड़ा व्यवस्था के सामूहिक परिणाम को दर्शाता है, न कि हर शिकायत में पैसे वापस मिलने की गारंटी को।

दूसरा कदम: केवल फोन करके न रुकें, ऑनलाइन शिकायत भी पूरी करें

1930 पर शिकायत दर्ज कराने के बाद राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत की प्रक्रिया पूरी करें।

आधिकारिक पोर्टल:
https://www.cybercrime.gov.in

शिकायत के दौरान घटना का सही समय, ठगी की रकम, बैंक या वॉलेट का नाम और ट्रांजैक्शन आईडी जैसी जानकारी तैयार रखें। हेल्पलाइन से शिकायत दर्ज होने पर मिलने वाले निर्देशों का पालन करें और यदि पोर्टल पर अतिरिक्त विवरण या शिकायत पूरी करने के लिए कहा जाए, तो उसे जल्द पूरा करें।

शिकायत का संदर्भ नंबर या पावती सुरक्षित रखें। इससे आगे की कार्रवाई के संबंध में जानकारी प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।

तीसरा कदम: अपने बैंक को तुरंत सूचना दें

सिर्फ साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करना पर्याप्त नहीं है। अपने बैंक के आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर, मोबाइल बैंकिंग ऐप या शाखा के माध्यम से भी धोखाधड़ी की सूचना दें।

बैंक से संबंधित लेनदेन की जांच करने और उपलब्ध प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई करने का अनुरोध करें। यदि कार्ड, UPI या इंटरनेट बैंकिंग का दुरुपयोग हुआ है, तो जरूरत के अनुसार संबंधित सुविधा को बंद या सुरक्षित कराएं।

बैंक को शिकायत देने की तारीख, समय और शिकायत संख्या सुरक्षित रखें।

भारतीय रिजर्व बैंक ने अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन की सूचना तुरंत देने पर जोर दिया है। ग्राहक की देयता इस बात पर भी निर्भर कर सकती है कि लेनदेन कैसे हुआ, ग्राहक की कोई लापरवाही थी या नहीं और सूचना कितनी जल्दी दी गई।

चौथा कदम: ये सबूत बिल्कुल न मिटाएं

कई लोग डर या शर्मिंदगी के कारण ठगी से जुड़े मैसेज और कॉल रिकॉर्ड मिटा देते हैं। ऐसा न करें। उपलब्ध साक्ष्य जांच में उपयोगी हो सकते हैं।

इन चीजों को सुरक्षित रखें:

  • बैंक से आया पैसे कटने का SMS।

  • UPI या बैंक ट्रांजैक्शन की रसीद।

  • ट्रांजैक्शन आईडी या UTR नंबर।

  • ठग का मोबाइल नंबर, WhatsApp चैट या ईमेल।

  • संदिग्ध वेबसाइट, लिंक या ऐप की जानकारी।

  • बैंक और साइबर पोर्टल पर दर्ज शिकायत की पावती।

अपनी शिकायत में सही तथ्य दें और मूल रिकॉर्ड में बदलाव न करें।

पांचवां कदम: अगर रकम वापस नहीं आई तो क्या करें?

शिकायत दर्ज होने के तुरंत बाद रकम वापस आना जरूरी नहीं है। संबंधित बैंक, भुगतान सेवा और जांच एजेंसियों को मामले की जांच करनी पड़ सकती है।

यदि आपकी शिकायत पर उचित प्रगति नहीं हो रही है, तो शिकायत संख्या के साथ अपने बैंक के शिकायत निवारण विभाग से संपर्क करें। बैंक की प्रक्रिया के अनुसार आगे शिकायत बढ़ाएं। साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज शिकायत के संबंध में जरूरत पड़ने पर वहां दिए गए संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के नोडल अथवा शिकायत अधिकारी के विवरण भी देख सकते हैं।

याद रखें, किसी खाते में संदिग्ध रकम रोक दिया जाना और वह रकम पीड़ित को वापस मिल जाना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। वापसी संबंधित जांच, दावों और लागू प्रक्रिया पर निर्भर करती है।

सावधान! पैसे वापस दिलाने के नाम पर दूसरी ठगी से बचें

साइबर ठगी का शिकार होने के बाद कुछ लोग दोबारा ठगों के निशाने पर आ सकते हैं। कोई व्यक्ति खुद को साइबर विशेषज्ञ, पुलिस अधिकारी या रिकवरी एजेंट बताकर पैसे वापस दिलाने के बदले फीस मांग सकता है।

ऐसी स्थिति में सावधान रहें।

  • पैसे वापस दिलाने की गारंटी देने वाले अनजान व्यक्ति पर भरोसा न करें।

  • किसी को OTP, PIN, पासवर्ड या स्क्रीन शेयरिंग का एक्सेस न दें।

  • अनजान लिंक से ऐप डाउनलोड न करें।

  • किसी के कहने पर रकम वापस पाने के लिए दूसरी रकम ट्रांसफर न करें।

  • बैंक या पुलिस अधिकारी होने का दावा करने वाले व्यक्ति की पहचान आधिकारिक माध्यम से सत्यापित करें।

निष्कर्ष: साइबर ठगी के बाद समय और सही शिकायत महत्वपूर्ण हैं

साइबर ठगी होने पर शर्म या डर के कारण शिकायत करने में देरी न करें। सबसे पहले 1930 पर संपर्क करें, आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत पूरी करें, बैंक को सूचना दें और सभी साक्ष्य सुरक्षित रखें।

याद रखें: शिकायत जल्दी करने से रकम रोकने की कार्रवाई का अवसर मिल सकता है, लेकिन पैसे वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।

महत्वपूर्ण हेल्पलाइन: 1930
आधिकारिक वेबसाइट: https://www.cybercrime.gov.in

प्रदेश पुलिस एक्टिविटी पाठकों से अपील करता है कि इस जानकारी को अपने परिवार, मित्रों और WhatsApp समूहों में साझा करें, ताकि साइबर ठगी का शिकार होने पर लोग समय रहते सही कदम उठा सकें।

स्रोत: भारत सरकार का गृह मंत्रालय, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और भारतीय रिजर्व बैंक।